हिरनगाँव तिवारी ब्राह्मणों का इतिहास
(तिवारी वंशावली)
(कमई करहला से हिरनगाँवः एक वंशानुगत यात्रा)
लेखक और शोधकर्ता
पं. प्रशांत तिवारी फिरोजाबाद
प्रस्तावना
"स्वयं को जानना और अपनी जड़ों को पहचानना, मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। हम कौन हैं? हमारे पूर्वज कौन थे? उन्होंने किन परिस्थितियों में अपने कुल की मर्यादा को अक्षुण्ण रखा? ये प्रश्न सदैव मुझे प्रेरित करते रहे।
करहला, मथुरा की पावन भूमि, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बज्रनाभ का समाधि स्थल स्थित है, वहीं से हमारे तिवारी वंश का उद्गम और विस्तार हुआ। हिरनगऊ के तिवारी वंशजों के पूर्वजों की गौरवशाली गाथा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना मेरा एक नैतिक उत्तरदायित्व था। यह पुस्तक केवल एक पारिवारिक विवरण नहीं है, बल्कि यह उन पूर्वजों के चरणों में समर्पित एक श्रद्धा-पुष्प है, जिनके आशीर्वाद और संस्कारों की छाया में हम आज पल्लवित हो रहे हैं।
इस लेखन-यात्रा के दौरान मुझे अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, किंतु मेरी पूज्य माताजी, श्रीमती विमला तिवारी जी के अटूट विश्वास और मार्गदर्शन ने मुझे कभी रुकने नहीं दिया। उनका आशीर्वाद ही इस कार्य की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
यह पुस्तक हमारे परिवार के सभी सदस्यों के लिए एक सेतु का कार्य करेगी, जो नई पीढ़ी को उनके अतीत से जोड़कर उनमें अपनी संस्कृति और वंश के प्रति गर्व का बोध कराएगी। आशा है कि यह प्रयास हमारे कुल के गौरव को संजोने में एक छोटा सा, किंतु सार्थक कदम सिद्ध होगा।"
लेखक के बारे में दो शब्द-
* तिवारी वंशजों की निकासी कमई करहला तहसील छाता जनपद मथुरा की है हिरनगऊ के तिवारी वंशजों के पूर्वज इस ग्राम में निवास करते थे इनके पण्डा दहलन सोरों जिले के अंदर कासगंज उत्तर प्रदेश में निवास करते है दूरभाष नंबर 9536427590, 7409665845 है।
दिनांक-
(प्रशांत तिवारी फिरोजाबादी)
लेखक/शोधकर्ता ग्राम एवं पोस्ट हीरंगाँव
जिला फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश
हिरनगऊ जनपद फिरोजाबाद के तिवारी वंशजों का विवरण
परिवार वृक्ष
| क्र०स० | नाम | पिता का नाम | जन्म तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | | |
परिवार वृक्ष शाखा
| क्र०स० | नाम | पिता का नाम | जन्म तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री ईसुरी तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
| 2 | श्री तेजसिंह तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
| 3 | श्री हरदेव तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
| 4 | श्री रुद्र तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
परिवार वृक्ष शाखा प्रथम
| क्र०स० | नाम | पिता का नाम | जन्म तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री ईसुरी तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
परिवार वृक्ष शाखा द्वितीय
| क्र०स० | नाम | पिता का नाम | जन्म तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री तेजसिंह तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
| 2 | श्री रामलाल तिवारी | श्री तेजसिंह तिवारी | 1880 |
| 3 | श्री खुशालीराम तिवारी | श्री तेजसिंह तिवारी | |
| 4 | श्री उमरातसिंह तिवारी | श्री तेजसिंह तिवारी | |
| 5 | श्री देवीराम तिवारी | श्री तेजसिंह तिवारी | |
| 6 | श्री कंचनलाल तिवारी | श्री रामलाल तिवारी | 23-01-1905 |
| 7 | श्री रघुवीर तिवारी | श्री रामलाल तिवारी | |
| 8 | श्री श्रीराम तिवारी | श्री खुशालीराम तिवारी | 1894 |
| 9 | श्री बद्रीप्रसाद तिवारी | श्री खुशालीराम तिवारी | 30-01-1904 |
| 10 | श्री उमाशंकर तिवारी | श्री खुशालीराम तिवारी | 25-12-1910 |
| 11 | श्री श्यामलाल तिवारी | श्री उमराव सिंह तिवारी | |
| 12 | श्री गोपीनाथ तिवारी | श्री उमराव सिंह तिवारी | |
| 13 | श्री दस कुमार तिवारी | श्री कंचनलाल तिवारी | |
| 14 | श्री राधेश्याम तिवारी | श्री रघुवीर तिवारी | |
| 15 | श्री लक्ष्मण प्रसाद तिवारी | श्री रघुवीर तिवारी | - |
| 16 | श्री मुन्ना तिवारी | श्री रघुवीर तिवारी | - |
| 17 | श्री किशन तिवारी | श्री रघुवीर तिवारी | |
| 18 | श्री जगलाल तिवारी | श्री रघुवीर तिवारी | |
| 19 | श्री पंडित लक्ष्मण स्वरुप तिवारी | श्री श्रीराम तिवारी | 01-01-1928 |
| 20 | श्री परमेश्वर दयाल तिवारी | श्री श्रीराम तिवारी | 27-07-1938 |
| 21 | श्री रामलक्ष्मण तिवारी | श्री बद्रीप्रसाद तिवारी | 22-01-1922 |
| 22 | श्री हरिविलास तिवारी | श्री बद्रीप्रसाद तिवारी | 05-01-1928 |
| 23 | श्री शांतिस्वरूप तिवारी | श्री उमाशंकर तिवारी | 09-11-1958 |
| 24 | श्री रामगोपाल तिवारी | श्री श्यामलाल तिवारी | 01-01-1921 |
| 25 | श्री श्रीभगवान तिवारी | श्री श्यामलाल तिवारी | 30-01-1928 |
| 26 | श्री अमरनाथ तिवारी | श्री गोपीनाथ तिवारी | 02-01-1932 |
| 27 | श्री केदारनाथ तिवारी | श्री गोपीनाथ तिवारी | 1945 |
| 28 | श्री ऋषिकेश तिवारी | श्री लक्ष्मणस्वरूप तिवारी | 30-07-1951 |
| 29 | श्री राकेश तिवारी | श्री लक्ष्मणस्वरूप तिवारी | 05-10-1953 |
| 30 | श्री प्रेमस्वरूप तिवारी | श्री लक्ष्मणस्वरूप तिवारी | 30-09-1955 |
| 31 | श्री बसंत कुमार तिवारी | श्री लक्ष्मणस्वरूप तिवारी | 01-10-1959 |
| 32 | श्री प्रदीप कुमार तिवारी | श्री परमेश्वर दयाल तिवारी | 08-04-1960 |
| 33 | श्री विजय प्रकाश तिवारी | श्री परमेश्वर दयाल तिवारी | 22-08-1961 |
| 34 | श्री अजयकांत तिवारी | श्री रामलक्ष्मण तिवारी | 1959 |
| 35 | श्री बृजेश कुमार तिवारी | श्री रामलक्ष्मण तिवारी | 1960 |
| 36 | श्री तुलसीराम तिवारी | श्री हरविलास तिवारी | 01-02-1954 |
| 37 | श्री प्रमोद कुमार तिवारी | श्री हरविलास तिवारी | 1960 |
| 38 | श्री राजेश तिवारी | श्री हरविलास तिवारी | 01-10-1969 |
| 39 | श्री विनय तिवारी | श्री शांतिस्वरुप तिवारी | 23-11-2000 |
| 40 | श्री स्वतंत्र तिवारी | श्री रामगोपाल तिवारी | 15-08-1947 |
| 41 | श्री राधामोहन तिवारी | श्री रामगोपाल तिवारी | 02-02-1953 |
| 42 | श्री विमल कुमार तिवारी | श्री रामगोपाल तिवारी | |
| 43 | श्री मदन मोहन तिवारी | श्री रामगोपाल तिवारी | |
| 44 | श्री ब्रजमोहन तिवारी | श्री रामगोपाल तिवारी | 02-04-1954 |
| 45 | श्री राजू तिवारी | श्रीभगवान तिवारी | |
| 46 | श्री शंकर तिवारी | श्रीभगवान तिवारी | |
| 47 | श्री अविनाश तिवारी | श्री अमरनाथ तिवारी | |
| 48 | श्री नवीन तिवारी | श्री केदारनाथ तिवारी | 31-12-1973 |
| 49 | श्री प्रवीण तिवारी | श्री केदारनाथ तिवारी | 04-07-1976 |
| 50 | श्री विवेक तिवारी | श्री ऋषिकेश तिवारी | 02-08-1980 |
| 51 | श्री विक्रांत तिवारी | श्री राकेश तिवारी | 18-07-1980 |
| 52 | श्री प्रशांत तिवारी | श्री राकेश तिवारी | 20-05-1985 |
| 53 | श्री रवि कुमार तिवारी | श्री राकेश तिवारी | 15-10-1987 |
| 54 | श्री अनुज तिवारी | श्री राकेश तिवारी | 10-09-1997 |
| 55 | श्री मनोज तिवारी | श्री प्रेमस्वरुप तिवारी | 09-Oct |
| 56 | श्री मनीष तिवारी | श्री प्रेमस्वरूप तिवारी | 09-Oct |
| 57 | श्री मयंक तिवारी | श्री प्रेमस्वरूप तिवारी | 13-02-1986 |
| 58 | श्री अजय तिवारी | श्री बसंत कुमार तिवारी | 30-03-1997 |
| 59 | श्री सनी तिवारी | श्री प्रदीप कुमार तिवारी | 29-Aug |
| 60 | श्री गगन तिवारी | श्री विजय प्रकाश तिवारी | 01-02-1990 |
| 61 | श्री रजत तिवारी | श्री विजय प्रकाश तिवारी | 26-01-1992 |
| 62 | श्री भारतेंद्र तिवारी | श्री तुलसीराम तिवारी | |
| 63 | श्री पीयूष तिवारी | श्री तुलसीराम तिवारी | 06-10-1984 |
| 64 | श्री अमन तिवारी | श्री प्रमोद कुमार तिवारी | 06-12-1993 |
| 65 | श्री शिवा तिवारी | श्री राजेश कुमार तिवारी | 05-04-2004 |
| 66 | श्री अन्नू तिवारी | श्री स्वतंत्र तिवारी | |
| 67 | श्री अजित तिवारी | श्री अविनाश तिवारी | |
| 68 | श्री गमन (ऋषभ) तिवारी | श्री नवीन तिवारी | 22-10-1999 |
| 69 | श्री संकल्प तिवारी | श्री नवीन तिवारी | 26-10-2000 |
| 70 | श्री हार्दिक तिवारी | श्री प्रवीन तिवारी | 26-Sep |
| 71 | श्री उत्कर्ष तिवारी | श्री विवेक तिवारी | 30-07-2007 |
| 72 | श्री अभिराम (राम) तिवारी | श्री विक्रान्त तिवारी | 12-10-2017 |
| 73 | श्री दक्ष तिवारी | श्री प्रशांत तिवारी | 07-09-2016 |
| 74 | श्री व्योम तिवारी | श्री रवि कुमार तिवारी | 16-08-2023 |
| 75 | श्री रिषित तिवारी | श्री मनोज तिवारी | 18-09-2012 |
| 76 | श्री ईवान तिवारी | श्री मनीष तिवारी | 15-10-2020 |
| 77 | श्री किन्छु तिवारी | श्री मयंक तिवारी | 08-Apr |
| 78 | श्री दुग्गू तिवारी | श्री पीयूष तिवारी | 25-02-2016 |
परिवार वृक्ष शाखा तृतीय
| क्र०स० | नाम | पिता का नाम | जन्म तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री हरदेव तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
| 2 | श्री जुगल किशोर तिवारी | श्री हरदेव तिवारी | |
| 3 | श्री बिहारी लाल तिवारी | श्री हरदेव तिवारी | |
| 4 | श्री लालाराम तिवारी | श्री हरदेव तिवारी | |
| 5 | श्री पन्नालाल तिवारी | श्री जुगल किशोर तिवारी | - |
| 6 | श्री सरदार तिवारी | श्री जुगल किशोर तिवारी | |
| 7 | श्री सियाराम तिवारी | श्री जुगल किशोर तिवारी | |
| 8 | श्री सिद्धार्थ तिवारी | श्री बिहारी लाल तिवारी | |
| 9 | श्री सिकत्तर तिवारी | श्री बिहारी लाल तिवारी | |
| 10 | श्री रामशरण तिवारी | श्री सरदार तिवारी | |
| 11 | श्री रामबाबू तिवारी | श्री सरदार तिवारी | |
| 12 | श्री रामप्रसाद तिवारी | श्री सिद्धार्थ तिवारी | |
| 13 | श्री ओम तिवारी | श्री सिद्धार्थ तिवारी | |
| 14 | श्री रामप्रकाश तिवारी | श्री सिकत्तर तिवारी | |
| 15 | श्री गप्पू तिवारी | श्री सिकत्तर तिवारी | |
परिवार वृक्ष शाखा चतुर्थ
| क्र०स० | नाम | पिता का नाम | जन्म तिथि |
|---|---|---|---|
| 1 | श्री रुद्र तिवारी | श्री पंडित जवाहर लाल तिवारी | |
ऐतिहासिक संदर्भ एवं तथ्य
* हिरनगऊ, से 12 किमी दूर फ्रांसीसी सेना प्रमुख डी. वेन ने नवंबर 1794 में फिरोजाबाद में आयुध निर्माणी की स्थापना की। मिस्टर थॉमस ट्रेविंग ने भी इस आयुध निर्माणी का उल्लेख अपनी पुस्तक 'ट्रैवल्स इन इंडिया' में किया है।
* 30 सितंबर 1803 को फिरोजाबाद शहर अंग्रेजों के अधीन हो गया और फिरोजाबाद शहर पर ब्रिटिश सरकार का शासन चलने लगा।
* The handwritten Hindi texts available in the book search written by Nagari Pracharini Sabha (Banaras Uttar Pradesh) 1817 में कोधाबम में उल्लेख किया गया है।
* लेखक क्षेमचंद सुमन ने अपनी हस्तलिखित पुस्तक 'स्वर्गीय हिंदी सेवी' भाग II में 1822 में हीरंगा गांव में एक अन्य परिवार के बसने का उल्लेख किया है।
* ऐसा प्रतीत होता है कि यह गांव उस समय अस्तित्व में था।
(पंडित जवाहरलाल तिवारी)
पंडित जवाहरलाल तिवारी (1900 शताब्दी)
फिरोजाबाद की माटी अपनी उपजाऊ शक्ति और गौरवमयी परंपराओं के लिए जानी जाती थी। इसी मिट्टी के हृदयस्थल में स्थित था 'हिरनगऊ' (वर्तमान हिरनगांव) नामक एक शांत और संस्कारित गाँव। इसी गाँव के एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में पंडित जवाहरलाल तिवारी का जन्म हुआ।
नाम 'जवाहर' - अर्थात गहना या मणि। जैसे एक मणि अपनी चमक से पूरे अंधकार को मिटा देती है, ठीक वैसे ही पंडित जवाहरलाल जी ने अपने व्यक्तित्व और आचरण से न केवल अपने कुल, बल्कि पूरे क्षेत्र में सम्मान प्राप्त किया। वे केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक थे, जिन्होंने नैतिकता और संस्कारों की शिक्षा को अपना धर्म माना।
समय का चक्र आगे बढ़ा और ईश्वर की अनुकंपा से उनका विवाह ग्राम 'नागऊ' की एक सुसंस्कृत कन्या के साथ संपन्न हुआ। उनका दांपत्य जीवन आदर्शों की नींव पर टिका था। घर में खुशियों ने तब और दस्तक दी जब उन्हें चार पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई - ईसुरी, तेजसिंह, हरदेव और रुद्र। उनके आंगन में दो कन्याओं की किलकारियां भी गूंजीं- गंगो और एक अन्य सुकन्या।
पंडित जवाहरलाल जी ने अपने पुत्रों को स्वाभिमान और विद्या के मार्ग पर चलना सिखाया। दूसरी ओर, अपनी पुत्रियों को उन्होंने संस्कारों के ऐसे आभूषण दिए, जो किसी भी वैभव से कहीं अधिक कीमती थे।
समय के साथ विवाह की घड़ियां आईं। उन्होंने अपनी बेटी गंगो का विवाह 'धनसिंह का नगला' में किया, जहाँ उसने अपने मायके की प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाया। वहीं, दूसरी पुत्री के विवाह के लिए नियति ने एक लंबी यात्रा का मार्ग चुना- राजस्थान के 'नगला हरसुख' तक। उन दिनों आवागमन के साधन आज जैसे नहीं थे, लेकिन पंडित जी के संस्कार और आशीर्वाद इतने प्रभावी थे कि उनकी बेटियां दूरस्थ स्थानों पर जाकर भी अपने परिवार के गौरव का प्रतीक बनी रहीं।
आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पंडित जवाहरलाल तिवारी जी एक वटवृक्ष की भांति दिखाई देते हैं, जिसकी जड़ें हिरनगांव में थीं और जिसकी शाखाएं फिरोजाबाद से लेकर राजस्थान की सीमाओं तक फैली हुई हैं। उनके चार पुत्रों ने आगे चलकर अपने-अपने क्षेत्र में परिवार की नींव को और मजबूत किया।
(पारिवारिक वृक्ष शाखा - 1)
(पंडित ईसुरी तिवारी पुत्र पंडित जवाहरलाल तिवारी)
पंडित ईश्वरी तिवारी (जन्म 1900 शताब्दी)
हिरनगांव की माटी केवल एक स्थान नहीं, बल्कि उन मूल्यों का आधार थी जिस पर पंडित जवाहरलाल तिवारी जी ने अपने परिवार का महल खड़ा किया था। 'जवाहर' की चमक उनके चारों पुत्रों- ईसुरी, तेजसिंह, हरदेव और रुद्र - के व्यक्तित्व में स्पष्ट दिखाई देती थी। इन चारों भाइयों के बीच का प्रेम और उनकी साझा जिम्मेदारी ने परिवार को सदैव एकजुट रखा।
इन भाइयों में ईसुरी तिवारी का व्यक्तित्व शांत लेकिन अत्यंत दृढ़ था। वे न केवल अपने पिता की गौरवशाली विरासत के संरक्षक थे, बल्कि अपने भाइयों के लिए एक आधार स्तंभ भी थे। उन्होंने अपने जीवन के हर निर्णय को ईश्वर की इच्छा और पितरों के आशीर्वाद के रूप में स्वीकार किया।
जब ईसुरी तिवारी जी का विवाह ग्राम धौर्रा की सुसंस्कृत कन्या के साथ संपन्न हुआ, तो यह दो परिवारों के मिलन के साथ-साथ एक नई पीढ़ी के सूत्रपात का प्रतीक था। उनके घर में जब रसप्यारी तिवारी का जन्म हुआ, तो मानो हिरनगांव की खुशियों में एक और मणि जुड़ गई।
रसप्यारी तिवारी जी का लालन-पालन पिता ईसुरी जी के संरक्षण में उन्हीं संस्कारों की छाया में हुआ, जो उन्हें उनके दादा पंडित जवाहरलाल तिवारी जी से मिले थे। उन्होंने घर की मर्यादा और परिवार के मान को हमेशा सर्वोपरि रखा। समय का चक्र जब विवाह के पड़ाव पर पहुँचा, तो पिता ईसुरी तिवारी जी ने पूरी विधि-विधान और आशीर्वाद के साथ अपनी लाडली बेटी रसप्यारी का कन्यादान किया। यह केवल एक विवाह नहीं था, बल्कि एक परंपरा का हस्तांतरण था- एक ऐसी परंपरा जो हिरनगांव से निकलकर दूर-दराज के गांवों तक अपनी सुगंध फैला रही थी।
(पारिवारिक वृक्ष शाखा - 2)
(पंडित तेज सिंह तिवारी पुत्र पंडित जवाहरलाल तिवारी)
पंडित तेजसिंह तिवारी (जन्म 1900 सदी)
जन्म ग्राम- हिरनगऊ तहसील फिरोजाबाद जनपद आगरा (वर्तमान राजस्व ग्राम - हिरनगाँव जनपद फिरोजाबाद) उत्तर-पश्चिमी प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में, इनकी कुलदेवी माता बेलोन (नरोरा) के आशीर्वाद से ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम जवाहरलाल तिवारी था। यह चार भाई थे बड़े भाई का नाम ईसुरी तिवारी एवं छोटे भाई का नाम हरदेव तिवारी, रूद्र तिवारी था एवं दो बहने थी बहन का नाम गंगो तिवारी दूसरी बहन का नाम अज्ञात है।
हिरनगाँव के खेतों में पले-बढ़े पंडित तेजसिंह तिवारी का व्यक्तित्व किसी बरगद के वृक्ष जैसा था- विशाल, छायादार और अडिग। कुलदेवी माता बेलोन के आशीर्वाद से उन्हें केवल शारीरिक बल ही नहीं, बल्कि सत्य के लिए अड़ने का साहस भी विरासत में मिला था।
वह समय ब्रिटिश हुकूमत का था। गोरे अफसर हिंदुस्तानियों को केवल 'श्रमिक' समझते थे। उन्हें यह गवारा नहीं था कि कोई भारतीय बच्चा शिक्षित होकर उनके बराबर खड़ा हो। लेकिन पंडित तेजसिंह ने अपनी पाठशाला में ज्ञान की जो मशाल जलाई थी, वह उनके जुल्मी तंत्र की आँखों में खटकने लगी थी।
एक सुबह, जब सूर्य की किरणें हिरनगाँव की मिट्टी को चूम रही थीं, एक अंग्रेज सिपाही ने पंडित जी के द्वार पर दस्तक दी। अंग्रेज साहब का हुक्म था- तेजसिंह को उनके बंगले पर हाजिर होना था।
पंडित जी अपने स्वाभिमान को ढाल बनाकर सीधे साहब के दफ्तर पहुँचे। साहब अपनी कुर्सी पर अकड़कर बैठा था। उसने तिरस्कार भरी नजरों से तेजसिंह की ओर देखा और अंग्रेजी में आदेश दियाः
"पंडित जी, अगर आप बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं, तो मेरे बच्चों को भी घर आकर पढ़ाया करें।"
उस समय अंग्रेजी जानना भी एक बड़ी विद्या मानी जाती थी। साहब को लगा था कि वह पंडित जी को अपनी भाषा में फँसा लेगा। लेकिन उसने यह नहीं जाना था कि तेजसिंह की रगों में उस माटी का लहू है जो कभी झुकना नहीं जानता।
पंडित तेजसिंह तिवारी ने साहब की आँखों में आँखें डालकर, उसी की भाषा में करारा उत्तर दियाः
"I do not teach children at anyone's home, but only teach children in school." (मैं किसी के घर जाकर गुलामी की तरह नहीं पढ़ाता, मैं केवल पाठशाला में राष्ट्र के बच्चों को शिक्षा देता हूँ।)
साहब का चेहरा गुस्से से तमतमा गया। उसने पैसों का लालच दिया, धमकियाँ दीं, पर पंडित जी ने अटल स्वर में कहा:
"साहब, मैं विद्या बेचता नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य गढ़ता हूँ। विद्या केवल आपके बच्चों की जागीर नहीं, यह देश की धरोहर है।"
वह दिन पंडित तेजसिंह तिवारी के जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत थी। घर लौटकर जब उन्होंने यह बात अपने परिवार को बताई, तो उनके मन में केवल एक ही लक्ष्य था - आजादी।
उन्होंने समझ लिया था कि जब तक यह गोरी हुकूमत है, तब तक भारत के बच्चों को सही शिक्षा नहीं मिल सकती। उस दिन के बाद, पंडित तेजसिंह की पाठशाला केवल अक्षर ज्ञान का केंद्र नहीं रही, वह क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना बन गई। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर युवाओं को जागृत करना शुरू किया। वे लाठी और कलम दोनों के धनी थे।
जहाँ एक ओर वे बच्चों को पढ़ाते थे, वहीं दूसरी ओर उन्हें गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने का पाठ भी पढ़ाते थे। लोग कहते हैं कि जब वे बच्चों को पढ़ाते थे, तो उनके चेहरे पर वही 'तेज' चमकता था जो उनके माता-पिता ने बचपन में देखा था। वह तेज जो किसी भी अंधेरी रात को चीरने का सामर्थ्य रखता था।
पंडित तेजसिंह तिवारी बचपन में अपनी ननिहाल ग्राम नागऊ वर्तमान जिला फिरोजाबाद पैदल पैदल जाते थे। गांव से इनकी ननिहाल की दूरी लगभग 3 किलोमीटर थी। यह कई दिनों तक अपने भाई एवं बहन के साथ अपनी ननिहाल में रुक कर आते थे। ननिहाल में इनको बहुत प्यार मिलता था इस कारण यह बचपन में बहुत शरारत करते थे। बचपन से ही इनको अपने भाइयों से बहुत प्रेम था। भाई मिलजुल कर कार्य करते थे और जो कुछ कार्य करने से धन मिलता था उससे अपना जीवन यापन परिवार चलाने के लिए करते थे।
परमेश्वर की असीम अनुकंपा एवं पूर्वजों के आशीर्वाद से समय के साथ साथ इनका विवाह मनोहरपुर से संपन्न हुआ। इसके उपरांत इनको चार पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई:
* पुत्रों का नाम खुशालीराम तिवारी, उमरावसिंह तिवारी, रामलाल तिवारी, देवीराम तिवारी था।
* बेटी का नाम जमुना तिवारी था।
प्रथम पुत्र रत्न प्राप्त होते ही इनके घर परिवार में खुशहाली आ गई सभी लोग बड़े प्रसन्न थे अपने परिवार की खुशहाली को देखते हुए इन्होंने अपने बड़े पुत्र का नाम पंडित खुशालीराम तिवारी रख दिया। समय के साथ-साथ इनके चारों पुत्र बड़े होते गए और अपने सभी पुत्रों का विवाह समय को देखते हुए संपन्न कर दिया।
* जमुना तिवारी - परमेश्वर की असीम अनुकंपा एवं पूर्वजों के आशीर्वाद से पुत्री की शादी पंडित गिरवर के साथ निवासी- ग्राम धीरपुरा जनपद फिरोजाबाद में कर दी।
माता बेलोन कुलदेवी का आशीर्वाद प्राप्त कर क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी ने 1857 की क्रांति की जंग में भाग लिया। 1857 की क्रान्ति की शुरूआत '10 मई 1857' की संध्या को मेरठ में हुई थी और इसको समस्त हिंदुस्तानी 10 मई को प्रत्येक वर्ष "क्रान्ति दिवस" के रूप में मनाते हैं।
फिरोजाबाद नगर के संबंध में 13 मार्च 1918 को उत्तर पश्चिम प्रदेश के वैदेशिक विभाग की एक फाइल जो कि सचिव सचिवालय उत्तर प्रदेश में है जिसमें 1857 क्रांति में आगरा क्षेत्र के अंतर्गत घटित घटनाओं का एक छोटा सा विवरण दिया गया है जिसमें कहा गया है कि फिरोजाबाद परगना में स्थित कुछ क्षेत्रों के निवासी हिंसात्मक कार्य में सक्रिय नहीं है फिर भी वह ब्रिटिश शक्ति की आज्ञा की अवहेलना कर रहे हैं। इस वृत्तांत से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि फिरोजाबाद नगर में 1857 की क्रांति के बाद भी हिंदुस्तानियों के दिलों में क्रांति की भावना बनी रही।
पंडित तेजसिंह तिवारी का देहांत ग्राम हिरनगऊ में हो गया। एक क्रांतिकारी ने अपना संपूर्ण जीवन हिंदुस्तान की आजादी के लिए न्योछावर कर दिया एवं हिंदुस्तानी दिलों में हमेशा के लिए अपना नाम अमर कर गए।
मूल शोध अभिलेख / समाचार पत्रों के अंश:
1. Crime Mail (क्राइम मेल) - 12 मई 2020 (मंगलवार), अलीगढ़ से प्रकाशित
* शीर्षक: आज हम भुला चुके एक स्वतंत्रता संग्राम सैनानी का नाम: पंडित तेजसिंह तिवारी
* विवरण: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में पंडित तेजसिंह तिवारी का नाम बहुत शिद्धत से लिया जाता है। मगर निजी कारणों से इतिहास में पंडित तेजसिंह तिवारी नाम दब कर रह गया... (अंग्रेज अफसर से संवाद और 1857 की क्रांति में योगदान का पूरा विवरण)।
2. Navbharat Times (नवभारत टाइम्स) - 14 अगस्त 2020
* शीर्षक: यहाँ रहते थे हिरन और गाय
* विवरण: फिरोजाबाद जिले के हिरनगांव का इतिहास काफी पुराना है। गांव के 80 साल के वृद्ध खुशीराम बताते हैं कि पहले इस गांव में हिरन और गाय रहती थीं इसलिए पहले के बुजुर्गों ने इस गांव का नाम हिरनगौ रखा था जो बाद में हिरनगांव हो गया। 30 सितंबर 1803 को फिरोजाबाद पर अंग्रेजों ने अधिकार जमा लिया था। 1800 सदी में जन्मे इस गांव के क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी ने साल 1857 की क्रांति में भी हिस्सा लिया था। इनके बेटे पंडित खुशालीराम तिवारी ने हिरनगांव प्राथमिक विद्यालय को अपनी जमीन दान में दे दी थी।
3. Dainik Rajpath (दैनिक राजपथ) - 7 अक्टूबर 2020
* शीर्षक: आज हम भुला चुके 1800 सौ सदी में जन्मे एक क्रांतिकारी का नाम- पंडित तेजसिंह तिवारी (पेज संख्या-07)
4. Swarajya Times (स्वराज्य टाइम्स) - 2 मार्च 2021 (आगरा)
* शीर्षक: 1800 सौ सदी में जन्मे हिरनगाँव निवासी क्रांतिकारी: पंडित तेजसिंह तिवारी
5. Navbharat Times (नवभारत टाइम्स) - 28 सितंबर 2022
* शीर्षक: बस अंग्रेज निकल जाएं
* विवरण: 18वीं सदी में एक क्रांतिकारी हुए, पंडित तेजसिंह तिवारी। वह बचपन से ही हृष्ट-पुष्ट थे और उनके चेहरे पर एक अद्भुत तेज था... (शिक्षक के रूप में कार्य और अंग्रेज अधिकारी को करारा जवाब)।
6. Shaheedi Dariya (शहीदी दरिया) - 28 मार्च 2023
* शीर्षक: हिंदुस्तानी शिक्षक ने कर दी अंग्रेजों की बोलती बंद (अलीगढ़)
7. Sandesh Vahak (संदेश वाहक) - 01 अप्रैल 2023
* प्रेरक प्रसंग: इस शिक्षक ने भारतीय बच्चों को बताए अधिकार और कर्तव्य, अंग्रेजों की कर दी बोलती बंद
पुस्तक संदर्भ एवं पृष्ठ संख्या:
* पुस्तक: भारत में स्वतंत्रता तथा लोकतंत्रात्मक गणराज्य का उदय (लेखक: बी० एस० परसीडीया) - पेज संख्या-89 (उल्लेख: हिरणगांव के पंडित तेजसिंह तिवारी)
* पुस्तक: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का साहित्य पक्ष (लेखक: वीर सिंह) - पेज संख्या-06 (उल्लेख: अमर शहीद पंडित तेजसिंह उत्तर प्रदेश)
* पुस्तक: मुस्लिम विदुषियों की घर वापसी (लेखक: मधु धामा) - पेज संख्या-70 (उल्लेख: क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी के ग्राम हिरनगाँव में आगमन और संवाद)
संदर्भ सूची:
* 12 मई 2020 को क्राइम मेल राष्ट्रीय समाचार पत्र अलीगढ़ ("आज हम भुला चुक